‘इल  पोस्तिनो’ : समुद्र, एक पोस्टमैन और इंतज़ार की कविता

इल  पोस्तिनो (द पोस्टमैन)

अमेय कान्त

क्या समुद्र और एक पुरानी साइकिल के बीच भी किसी तरह का कोई रिश्ता पनप सकता है? ऐसे रिश्ते के आखिर में क्या सिर्फ़ एक लंबा इंतज़ार और खारापन ही बचा रह पाता है? ऐसा क्यों होता है कि कई बार हवाएँ जब अगले मौसमों में वापस लौटती हैं तो कहीं किसी कोने में उन्हें सिर्फ़ उजाड़ फैला हुआ मिलता है?

इस फ़िल्म को देखकर ऐसा ही कुछ महसूस होता है।

चिली  के  जाने-माने  कवि  पाब्लो नेरूदा अपनी कविताओं में गहरी राजनीतिक प्रतिबद्धता और उत्कट प्रेम, दोनों के लिए जाने जाते हैं। चिली से निष्कासन के दौरान वे कुछ समय तक एक ख़ूबसूरत से द्वीप पर जाकर रहे थे। इस समय को आधार बनाकर इतालवी लेखक अंतोनियो स्कार्मेता ने ‘इल पोस्तिनो’ (द पोस्टमैन) नाम से उपन्यास लिखा जिस पर बाद में इसी नाम से यह फ़िल्म बनी।

मोस्सिमो त्रोइज़ी  की यह फ़िल्म  ‘इल  पोस्तिनो (द पोस्टमैन)’ इस द्वीप पर रहने वाले एक भोले-भाले पोस्टमैन  मारिओ और नेरूदा के  बीच बनने वाले दोस्ती के रिश्ते की कहानी है। मारिओ बीट्रिस नाम की एक लड़की से प्रेम करता है। नेरूदा से मिलने के बाद मारिओ के भीतर कविता भी आहिस्ता-आहिस्ता जगह बना रही है। बाद में मारिओ और बीट्रिस की शादी होती है जिसमें नेरूदा अहम भूमिका निभाते हैं। आखिर एक दिन नेरूदा को अपने देश लौटना होता है और मारिओ अपने इस दोस्त की कुछ मीठी स्मृतियों के साथ अपने छोटे-से गाँव में छूट जाता है। कुछ सालों बाद नेरूदा अपनी पत्नी के साथ लौटते ज़रूर हैं लेकिन पाते हैं कि उनका वह दोस्त अब नहीं है।

इस कथानक के बीच फ़िल्म एक कविता की तरह चलती है। इसमें कई सुंदर दृश्य हैं। संगीत ऐसा है जैसे समुद्र की लहरें आगे बढ़कर किनारे को भिगोएँ और फिर पीछे हटते हुए दूर चली जाएँ। फ़िल्म के अंत में दर्शक भी खुद को उसी भीगे हुए किनारे की तरह महसूस करता है।

यह फ़िल्म 1994 में रिलीज़ हुई थी। पाब्लो नेरूदा की भूमिका में फ़िलिप नोइरे का अभिनय बेहतरीन था। संगीत लुईस बाकालोव ने दिया था। फ़िल्म में पोस्टमैन की भूमिका के लिए मोस्सिमो त्रोइज़ी की दुनिया भर में ख़ूब प्रशंसा हुई। त्रोइज़ी जो असल में एक हास्य अभिनेता थे, पाब्लो नेरुदा की कविताओं से काफ़ी प्रभावित थे और इसलिए लंबे समय से उन पर फ़िल्म बनाना चाह रहे थे। लेकिन फ़िल्म की सारी तैयारियाँ हो जाने के बाद उनकी सेहत बिगड़ने लगी और उन्हें हिदायत दी गई की वे जल्दी ही दिल का ऑपरेशन करवा लें। उन्होंने अपने निर्देशक रेडफ़ोर्ड की सलाह न मानते हुए फ़िल्म में मुख्य भूमिका ही निभाई  लेकिन बहुत ज़्यादा शारीरिक श्रम हो जाने के कारण फ़िल्म की रिलीज़ के पहले ही दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।

यह एक दुःखद संयोग ही था कि बिल्कुल मारिओ के किरदार की तरह त्रोइज़ी भी क्लाइमेक्स के पहले ही परदे से जा चुके थे, हमेशा के लिए।


अंत में इसी फ़िल्म पर गीत चतुर्वेदी की एक ख़ूबसूरत कविता :

पोस्टमैन
[निर्वासन के दिनों में एक छोटे द्वीप पर नेरूदा के साथी के लिए]

 

अपने कमरे में लेटा पोस्टमैन है
जो नेरूदा को पहुँचाता था डाक
हालाँकि उन्हें गए अरसा बीत गया
जैसे आवाज़ करती है सुने जाने का इंतज़ार
और भटकती है हवा में अनंतकाल तक
जैसे दृश्य से जुड़ा होता है दृष्टि का इंतज़ार
घर से निकली बेटी का माँ करती है जैसे
वैसी ही बेचैनी
जिसे वह सर्द रात में ओढ़ लेता है
और तपते दिन में झल लेता है

 

क्या सोचा होगा महाकवि ने
जब पोस्टमैन ने की होगी ज़िद
कि लिख दें वह उसकी प्रेमिका के लिए एक कविता
जिसे वह कहेगा अपनी
कि आपके पास इतनी महिलाओं की चिट्ठी आती है
कि मेरा भी मन करता है कवि बन जाऊँ

 

नेरूदा के भीतर जागा होगा पिता
साँसों से दुलारा होगा उसे
और उंगली थमा ले गए होंगे समंदर तक
उसे बताया होगा कि सपनों को सपनों की तरह ख़ारिज मत करो
जंगल से मिलो तो हरी पत्ती बनकर
पानी से बन चीनी का दाना
लकड़ी से काग़ज़ और मनुष्य से संगीत बनकर

 

और जीवन में प्रवेश कर गए होंगे
उसके जीवन में एक सूना डाकख़ाना छोड़

 

वह कर रहा है इंतज़ार जीवन के पार
हरियाली मिठास शब्द और सुर की अर्घ्य देता

 

वह क्या है जो इस कमरे में नहीं है
जिसके लिए ख़ाली है जगह
इस किताब में नहीं जो छोड़ दिया एक पन्ना सादा
इस कैसेट में जिसके एक ही तरफ़ आवाज़ है
इस शरीर में जिसके मध्य खाई-सी बन गई है
इस शख़्स में जो थकान के बाद भी भटकता है बिस्तर पर
भीतर कहीं टपकता है जल या आँख का नल

 

जिसके पास रोज़ गट्ठरों में पहुँचती हो चिट्ठी
वह क्यों नहीं देता उसकी चिट्ठी का जवाब
वह जागेगा तब तक सो चुकी होगी दुनिया
फिर वह अपनी अनिद्रा में कसमसाएगा

 

चाय हमेशा तभी क्यों उबलती है
जब आप किचन में नहीं होते
पंक्तियाँ तभी क्यों आती हैं
जब आपके पास क़लम नहीं होता
लोग तभी क्यों लौटकर आते हैं
जब आपका बदन नहीं होता

 

पोस्टमैन
तुम्हें नसीब हुआ निर्वासन के सबसे गुप्त द्वीप पर
दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत उंगलियों का साथ
तुमने सहेजकर रखी उस चिडि़या की आवाज़
रिकॉर्डर में डाला लहरों का कलरव
उस धुन को जो कँपाती थी नेरूदा के होंठ
और सबसे अंत में जो तुम्हारी आवाज़ थी
उसमें तुम्हारी उम्मीद को सुना जाना चाहिए

 

महाकवि जब मरे
तो उनके दिल में एक खाई बन गई थी
लोगों ने कहा
यह उनके देश में लोकतंत्र की मृत्यु के कारण बनी
उनकी सबसे प्यारी चिडि़या के पंख नुँच जाने के कारण
दरअसल
एक अन्याय से हुआ था वहाँ विस्फोट
और उतना टुकड़ा प्रायश्चित कर रहा है
पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए   
000

 

यह फ़िल्म अंग्रेज़ी सबटाइटल्स के साथ फ़िलहाल यूट्यूब पर उपलब्ध है.

लिंक:

Share

6 Replies to “‘इल  पोस्तिनो’ : समुद्र, एक पोस्टमैन और इंतज़ार की कविता

  1. अहा ! कितना सुंदर लिखा।
    कवि पर कोई उपन्यास , फिर उसपर कोई फ़िल्म और उसमें भूमिका निभाए कोई कवि का प्रेमी अभिनेता !!!
    फ़िल्म देखने को मन मचल रहा है
    न सही समुद्र तट
    वर्षा तो तो है !

  2. Really their poem is very important, emotional, but your article is also empress, congratulations to you

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *