दो हज़ार फ़ीट ऊपर, जहाँ डर के सिवा कुछ नहीं बचता

दीप्ति कुशवाह   ‘फ़ॉल’ के दूसरे भाग के आने से पहले पहली फ़िल्म की स्मृति आईमैक्स में ‘फ़ॉल 2: डेडपॉइंट’ का पोस्टर देखा तो उसकी […] Read More

‘मट्टो की साइकिल’ : प्रश्नों के बीहड़ में भटकता मन

  ललन चतुर्वेदी   मेरे लिए ‘मट्टो’ की साइकिल’ देखना निजी अनुभवों और स्मृतियों से गुज़रना है। इसे देखते हुए मैंने इसके संवादों से अधिक […] Read More

“मैं एक किताब हूँ और तुम एक फ़ुटनोट”

राजेश सक्सेना   (“मैं एक किताब हूँ और तुम एक फ़ुट नोट” यह कथन हिटलर के सबसे खतरनाक और सेकंड इन कमान राइसमार्शल हरमन गोरिंग […] Read More

‘अ रियल पेन’ – ठहरे पानी के बीच से चुपचाप गुज़रते हुए : अमेय कान्त

अतीत कई जगहों पर तकलीफ़देह होता है। कभी-कभी तो इतना कि इसकी टीस पीढ़ियों तक महसूस होती रहती है। लेकिन क्या सच में ऐसा है? […] Read More

‘लव-ऑल’ – जीवन में जीत के मायने : अमेय कान्त

Movie: Love-All बैडमिंटन और टेनिस में ज़ीरो पॉइंट को ‘लव’ कहा जाता है। इसका मूल फ़्रेंच शब्द ‘l’oeuf’ है, जिसका मतलब होता है – अंडा। […] Read More

भयानक वर्तमान की मर्मान्तक अनुगूंजें : अमेय कान्त

कहते हैं कि पिकासो की ‘गुएर्निका’ पेंटिंग को देखकर जब एक नाज़ी अफ़सर ने उनसे पूछा था कि “इसे तुमने बनाया?” तो उनका जवाब था […] Read More

बदलते दौर में ‘भारतीय’ सिनेमा और रीमेक की ज़रूरत : अमेय कान्त

बदलते दौर में ‘भारतीय’ सिनेमा और रीमेक की ज़रूरत एक समय था जब ‘साउथ की फ़िल्म’ कहने पर रजनीकान्त की एक्शन फ़िल्में दिमाग में आती […] Read More

ओटीटी पर हिंदी डब में हॉलीवुड की 10 चर्चित फ़िल्में (साल 2000 से पहले तक)

(Hollywood Hindi Dubbed Movies before 2000 available on OTT)   लॉरेंस ऑफ़ अरेबिया (Lawrence of Arabia) 1962 (नेटफ़्लिक्स पर) यह फ़िल्म टीई लॉरेंस की किताब […] Read More

‘चमकीला’ – एक मटमैला-सा गीत : अमेय कान्त

इम्तियाज़ अली की फ़िल्म ‘अमरसिंह चमकीला’ हाल ही में नेटफ़्लिक्स पर रिलीज़ हुई. रिलीज़ के बाद से ही यह फ़िल्म काफ़ी चर्चा में है. इसे […] Read More