नसीरुद्दीन शाह : जब अभिनेता पर्दे से उतरकर नागरिक बन जाता है

संदीप नाईक   ​एक अभिनेता, एक रंगकर्मी और असहमति की नैतिक आवाज़ ​भारतीय सिनेमा में कुछ कलाकार अपनी फ़िल्मों की संख्या से नहीं, बल्कि उन […] Read More

‘मट्टो की साइकिल’ : प्रश्नों के बीहड़ में भटकता मन

  ललन चतुर्वेदी   मेरे लिए ‘मट्टो’ की साइकिल’ देखना निजी अनुभवों और स्मृतियों से गुज़रना है। इसे देखते हुए मैंने इसके संवादों से अधिक […] Read More

‘दो बूँद पानी’ : भारतीय सिनेमा में पानी का एक मार्मिक आख्यान

मनीष वैद्य   आज से क़रीब पचास साल पहले जल संकट की भयावहता आज की तरह गंभीर भले ही न रही हो, लेकिन देश के […] Read More

‘लव-ऑल’ – जीवन में जीत के मायने : अमेय कान्त

Movie: Love-All बैडमिंटन और टेनिस में ज़ीरो पॉइंट को ‘लव’ कहा जाता है। इसका मूल फ़्रेंच शब्द ‘l’oeuf’ है, जिसका मतलब होता है – अंडा। […] Read More

ब्लैक एंड व्हाइट फ़िल्मों का दौर और राज कपूर : अमेय कान्त

राज कपूर एक ऐसा नाम हैं जिसके बिना भारतीय सिनेमा की कल्पना करना मुश्किल है. उन्होंने हिंदी सिनेमा को एक अलग पहचान दी, उसे नई […] Read More

बदलते दौर में ‘भारतीय’ सिनेमा और रीमेक की ज़रूरत : अमेय कान्त

बदलते दौर में ‘भारतीय’ सिनेमा और रीमेक की ज़रूरत एक समय था जब ‘साउथ की फ़िल्म’ कहने पर रजनीकान्त की एक्शन फ़िल्में दिमाग में आती […] Read More

‘चमकीला’ – एक मटमैला-सा गीत : अमेय कान्त

इम्तियाज़ अली की फ़िल्म ‘अमरसिंह चमकीला’ हाल ही में नेटफ़्लिक्स पर रिलीज़ हुई. रिलीज़ के बाद से ही यह फ़िल्म काफ़ी चर्चा में है. इसे […] Read More

‘भक्षक’ – मेनस्ट्रीम मीडिया की चुप्पी के बीच अंधेरे से मुठभेड़ की ‘कोशिश’ : अमेय कान्त

मीडिया की भूमिका और इसके दायित्व को लेकर हमारे यहाँ अलग-अलग तरह से फ़िल्में बनी हैं। साल 1989 में टीनू आनन्द के निर्देशन में एक […] Read More

गाँवों-कस्बों की ज़िंदगी में झाँकतीं अचल मिश्रा (Achal Mishra) की फ़िल्में : अमेय कान्त

अचल मिश्रा (Achal Mishra) उन निर्देशकों में से हैं जिन्होंने बहुत कम समय में अपनी एक अलग पहचान बनाई है. कुछ समय लंदन फ़िल्म स्कूल […] Read More